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इतिहास और कल्पना के
मायाजाल में विलुप्त हो चुके विलक्षण शाश्वत पुरातन सत्य के प्रकट होने का समय आ चुका है...
Reviews
इस कहानी को बड़े ही संयम और धैर्य के साथ तसल्लीबख्श ढंग से धीमी आंच पर पकते पकते पकाया गया है।
राजीव तनेजा, पुस्तक समीक्षक
सौरभ न सिर्फ महाभारत युग के गुमनाम नायकों की कहानियां कहते हैं, बल्कि पाठकों को ऐतिहासिक युग की झलक दिखा जाते हैं।
अमर उजाला
लेखक की कल्पना शक्ति अभूतपूर्व है, साथ ही कल्पना को शब्दों में उतारने की उनकी क्षमता।
Special Coverage News
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